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Tuesday, April 7, 2009

क्या हम सब बदमाश हैं पिंकी.....??

"पिंकी, क्या मैं बदमाश हूँ.....??"
"नहीं तो,कौन कहता है....??"
"देख ना,मम्मी हर समय मुझे बदमाश-बदमाश कह कर डांटती ही रहती है.....??"
"....!!वो तो मेरी मम्मी भी मुझे दिन-रात यही कहती रहती है,सौ-सौ बार से ज्यादा डांटती होंगी मेरी मम्मी दिन भर में मुझे....!!और पापा भी तो कम नहीं नहीं है....एक तो रात को घर लौटते हैं....ऊपर से मम्मी उन्हें जो भी पढ़ा देती हैं,उसी पर मेरी वाट लगा देते हैं....!!"
"हाँ यार !!मेरा भी यही हाल है...और मेरा-तेरा ही क्यों हमारे सब दोस्तों का भी तो यही हाल है...सोचते हैं कि रात को पापा के आते ही उनको मम्मी के बारे में बताएँगे....कि उन्होंने हमें डांटा...हमें मारा....लेकिन ये पापा लोग भी मम्मी की ही सुनते हैं...बच्चों की बात पर तो विश्वास ही नहीं करते...!!"
"राहुल !!ये पापा लोग ऐसे क्यूँ होते हैं....??देख ना जब भी पापा हमें प्यार करते होते हैं कि रसोई से मम्मी जाती हैं....और कुछ ना कुछ ऐसी बात पापा को बता जाती हैं....कि पापा उल्टा ही हम पर पिल जाते हैं....उन्हें हमारी बात से कोई मतलब ही नहीं होता....!!"
"पता नहीं पिंकी....!!शायद मम्मी लोग कुछ ना कुछ जादू जानती जानती हैं...तभी तो प्यार करते हुए पापा भी अचानक आग-बबूला हो जाते हैं....और हमारी सिट्टी-पिट्टी गुम....!!बस एक ही बात...कि बदमाशी-बदमाशी-बदमाशी....ये बदमाशी ना हुई....भूत हो गई,जो हर समय हमारे पीछे पड़ी रहती है.....!!"
"हाँ राहुल..!!टी.वी देखो तो नहीं....गुडियों से खेलो तो नहीं...लुक्का-छिपी खेलो तो बोलेंगी बैठ कर खेलो...बैठ कर खेलो तो बोलेंगी हल्ला मत करो.....फिर हम क्या करें राहुल.....??"
"अरे यार यही तो मेरी समझ नहीं आता !!मैं अपनी छोटी कार फर्श पर या मेज पर चलता हूँ....तो नहीं....किसी छोटे बच्चे से खेलता हूँ....तो किसी बात पर वो रोने लगे....तो रसोई से ही मुझ पर चिल्लायेंगी...राहुल उसे मत छेडो
...क्या मैं कोई शैतान का बच्चा हूँ....जो सबको छेड़ता रहता हूँ....??"
"अब देखो ना राहुल....कल मैं आँगन वाले अमरुद के पेड़ पर चढ़ गई तो मेरी मम्मी कितना जोर से चीखी थीं....उस वक्त पापा भी तो घर में ही थे....झटपट वो बाहर निकले....तडातड उन्होंने मुझपर थप्पड़ बरसा दिए....कहने लगे लडकियां पेड़ पर नहीं चढ़तीं.....क्यूँ-क्यूँ...लडकियां पेड़ पर क्यूँ नहीं चढ़तीं ??"
"अरे बाप रे !!पेड़ पर चढ़ने के लिए तो अब तक मुझे इतनी मार मिल चुकी कि अब तो मुझे याद भी नहीं कि कितनी.....!!और तू लड़की की बात करती है....मैं तो लड़का हूँ....!!"
"....तो फिर हम करें तो क्या करें राहुल....मैं तो अब बड़ी तंग चुकी हूँ....इन पापा-और मम्मियों से....वैसे मैं पापा से बहुत प्यार करती हूँ....और वो भी मुझे....मम्मी से तो बहुत ही ज्यादा....मगर मेरी कभी नहीं सुनते....जब मम्मी उन्हें पट्टी पढ़ा देती हैं....!!"
"मैं भी यही सोचता हूँ....ये बदमाश शब्द तो हमारा पीछा ही नहीं छोड़ रहा.....!!"
"राहुल...!!ये बदमाश शब्द भला किसने बनाया है....चलो हम उसे मारते हैं.....!!"
"अरे पगली...!!ये तो डिक्शनरी में होता है....कोई बनाता थोडी ना है....!!"
" !!तो फिर बच्चे क्या करें.....??"
"मेरे दिमाग एन एक आईडिया आया है....!!"
"क्या ??...जल्दी बता ना.....!!"
"चल आज हम सब बच्चे शाम को पार्क में एक मीटिंग करते हैं....सब बच्चे तो अपने माँ-बाप से त्रस्त हैं ही...सब के सब हमारी बात जरूर मान लेंगे...और हम अपनी मांग मनवाने के लिए मोहल्ले में जुलुस निकालेंगे....!!
"धत्त !!.........जुलुस निकालेंगे.....सब को ही घर में और जोर की मार पड़ेगी....कान उमेठे जायेंगे....दर्द से बिलबिलाओगे ना.....तब पता चलेगा...हूँ जुलुस निकालेंगे....!!तुम भी ना राहुल....बिल्कुल मूर्खों वाले आईडिये खोज-खोज कर लाते हो....!!"
"तो क्या करें हम....क्या करें.....??"
"हम कुछ नहीं कर सकते....क्योंकि इस मामले में माँ-बापों की बड़ी तगडी तुकबंदी है....लगता है कोई यूनियनबाजी है....इन सके बीच....!!"
"तो क्या.... कोई उपाय नहीं....??"
"नहीं....!!मुझे तो दूर-दूर तक कोई उपाय नहीं दिखायी देता....!!"
"तो क्या ,हम सब इसी तरह मजबूर होकर जियें....??"
"सब ही तो जी रहे हैं....!!"
"तुम तो बिल्कुल डरपोक हो....मैं जाता हूँ किसी और के पास.....उसी से बात करूँगा....देख लेना पापा-मम्मी को तो हमारी बात माननी ही पड़ेगी....!!"
"हा-हा-हा-हा-हा-हा....!!तो जाओ ना....आज तुम सब बच्चों को मिला कर दिखा ही दो....जोर से चिल्ला कर कहों ना...दुनिया के बच्चों एक हों....हा-हा-हा-हा-हा-हा.....!!"
"अच्छा-अच्छा ज्यादा हंस कर मत दिखाओ....आज मैं तुम्हे दिखा कर ही रहूँगा....!!"
"तो जाओ ना.....यहाँ खड़े बात क्या बना रहे हो....!!"
"जा रहा हूँ....जा रहा हूँ....!!" और राहुल चला जाता है मोहल्ले के सब बच्चों को मिलाने....एक क्रान्ति का सूत्रपात करने....!!

Sunday, April 5, 2009

बन्दे-मातरम......बन्दे-मातरम......!!

Sunday, April 5, 2009

बन्दे-मातरम्,,,बन्दे-मातरम्....,!!

"..........गीता पर हाथ रखकर कसम खा कि जो कहेगा,सच कहेगा,सच के सिवा कुछ नहीं कहेगा "
"हुजुर,माई बाप मैं गीता तो क्या आपके ,माँ-बाप की कसम खाकर कहता हूँ कि जो कहूँगा,सच कहूँगा,सच के सिवा कुछ भी नहीं कहूँगा...!!"
"तो बोल,देश में सब कुछ एकदम बढ़िया है...!!"
"हाँ हुजुर,देश में सब कुछ बढ़िया ही है !!"
"यहाँ की राजनीति विश्व की सबसे पवित्र राजनीति है !!"
"हाँ हुजुर,यहाँ की राजनीति तो क्या यहाँ के धर्म और सम्प्रदाय बिल्कुल पाक और पवित्र हैं,यहाँ तक की उनके जितना पवित्र तो उपरवाला भी नहीं....!!"
"हाँ....और बोल कि तुझे सुबह-दोपहर-शाम और इन दोनों वक्तों के बीच भर-पेट भोजन मिलता है !!"
"हाँ हुजुर,वैसे तो मेरे बाल-बच्चे और मैं और मेरी पत्नी हर शाम भूखे ही रहते हैं,लेकिन आप कहते हैं तो बताये देता हूँ कि हमें छहों वक्त भरपेट भोजन तो क्या मिलता है बल्कि ओवरफ्लो ही हो जाता है...मेरे जैसे लाखों इस देश के लोग भूखे होने की नौटंकी करते रहते हैं !!"
"जरुरत से ज्यादा मत बोल,जितना कहा जाए उतना ही बोल....!!"
"हुजुर थोड़े कहे को ज्यादा समझा....और ज्यादा बोल देता हूँ....आप ही की आसानी के लिए....हुजुर !!"
"ठीक है-ठीक है !!बोल इंडिया में चारों और शाईनिंग ही शाईनिंग है !!"
"हाँ हुजुर, शाईनिंग ही शाईनिंग तो क्या हमारा देश और उसके लाखों-लाख गाँव दिन-रात ऐसी रौशनी से जगमगा रहे हैं कि हर कोई इस जगमगाहट से अघा गया है.....!!"
"फिर जास्ती बोला तू.....!!"
"हुजुर,माई-बाप...!!गलती हो गई गई.....माफ़ कीजिये मालिके-आजम !!"
"हाँ,इसी तरह हम सबको इज्जत दे,सबकी इजात कर ....तभी सबसे इज्जत पायेगा....!!"
"हुजुर, इस देश में हम गरीबों को इतनी इज्जत-इतनी इज्जत मिल रही है कि उस इज्जत से हमारा हाजमा ख़राब हो रहा है,यहाँ तक कि हम सब कभी-कभी आप लोगों से बदतमीजी से पेश जाते हैं....!!"
"हाँ,अब तू समझदार होता जा रहा है....!!"
"हुजुर सब आपकी कृपा,आपकी इनायत है सरकार !!"
"हाँ,बस इसी तरह तू बोलता रह,हमारी चांदी होगी तो तेरी भी चांदी होगी है कि नहीं .....??"
"हाँ हुजुर,हमारी का तो पता नहीं.....आपकी जरुर होगी चांदी सरकार !!"
"अबे,जबान लड़ता है...??"
"हुजुर, फिर गलती हो गई....क्या करें जबान है ,लड़खड़ा ही जाती है,अब नहीं गलती होगी सरकार....!!"
"साला,बार-बार बोलता है गलती नहीं होगी-गलती नहीं होगी.....और बार-बार गलती भी करता है....अबे साला आदमी है कि भकड़मल्लू...!!"
"हुजुर आदमी नहीं हूँ...बस गरीब हूँ.....!!गरीब में और आदमी में क्या अन्तर होता है....सो तो सरकार ही जानती है...!!"
"हूँ....!!जरुरत से ज्यादा अक्ल गई है तुझे,साले तेरी खातिर ही हम सब सब मरते हैं...तेरे लिए ही तो क्या-क्या करते हैं....तब ही तो अपना कुछ कर पाते हैं....!!"
"दुरुस्त फ़रमाया सरकार....!!हमारे जीने पे-हमारे मरने पे ही आपकी जिन्दगी निर्भर है हुजुर-आला....!!"
"ठीक है-ठीक है.....इतनी सारी बातें तुने सच-सच कही....अब एक आखिरी बात भी सच बोल दे !!"
"सरकार,आप फरमाएं....हमें तो सिर्फ़ उसकी कापी करनी है....कहिये हुजुर...!!"
"तो बोल भारत माता की जय.....भारत माता की जय...!!"
"हुजुर,ये तो मैं नहीं बोलूँगा...!!"
"अबे क्यूँ-क्यूँ.....!!??"
"हुजुर हम तो मजूर लोग हैं.....आपका कहा हुआ...आपका बताया हुआ सच बोलते हैं.....इससे आप भी खुश हो जाते है,और हमारी आन का भी कुछ नहीं बिगड़ता....मगर इससे ज्यादा सच बोले को ना कहिये सरकार !!"
"अबे बोलता है कि नहीं ??"
"नहीं हुजुर....!!"
"अबे बोल....!!"
"नहीं हुजुर...!!"
"बोल.....!!"
"नहीं हुजुर.....!!
"तो ले,ये ले लात खा ...!!"
अबकी मजदूर उठता है.....अपनी लाठी उठाता है.....और अफसर को दे लाठी-दे लाठी....धुनना शुरू कर देता है ......लाठी के बेरहम प्रहार से अफसर अधमरा हो जाता है......अपनी लाठी उठाये मजदूर यह गाते हुए चल देता है
"बन्दे-मातरम्-बन्दे मातरम्.......!!"
दृश्य का पटाक्षेप होता है......और लेखक इस दृश्य के साकार होने की कल्पना में डूब जाता है.....!!

Friday, April 3, 2009

सबसे जुड़कर क्यूँ रहता हूँ.....!!

तनहा-तनहा जलता रहता हूँ
पर किसी का मैं क्या लेता हूँ !!
मुझमें तो हर कोई शामिल है
सबकी बातें कहता रहता हूँ !!
सबके गम तो मेरे मेरे गम हैं
सबके दुखडे सुनता रहता हूँ !!
सबमें खुद को शामिल करके
और सब खुद ही हो जाता हूँ !!
सबका दुखः मैं रोता रहता हूँ
अन्दर-अन्दर बहता रहता हूँ !!
सबको बेशक कुछ मुश्किल है
मुश्किल का मैं हल कहता हूँ !!
मुझमें कौन बैठा है "गाफिल"
सबसे जुड़कर क्यूँ रहता हूँ !!