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Monday, March 16, 2009

वरुण गाँधी ने उगला मुसलामानों के खिलाफ ज़हर !


उत्तर प्रदेश के पीलीभीत संसदीय क्षेत्र से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे वरुण गांधी ने बरखेडा में चुनावी सभा के दौरान मुसलमानों के खिलाफ जमकर ज़हर उगला। उन्होंने देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को भी नहीं बख्शा। उनके इस आक्रामक तेवर से बीजेपी भी सकते में है। चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस भी जारी किया। वरुण ने हाल ही में अपने संसदीय क्षेत्र पीलीभीत में एक रैली में कहा था,
'यह हाथ नहीं है। यह कमल का हाथ है। यह मुसलमानों का सर काट देगा, जय श्रीराम।'

एक अन्य सभा में उन्होंने कहा,
'अगर कोई हिंदुओं की तरफ उंगली उठाएगा या समझेगा कि हिंदू कमजोर हैं और उनका कोई नेता नहीं हैं, अगर कोई सोचता है कि ये नेता वोटों के लिए हमारे जूते चाटेंगे तो मैं गीता की कसम खाकर कहता हूं कि मैं उस हाथ को काट डालूंगा।'
वरुण ने कहा,
'जो हाथ हिंदुओं पर उठेगा, मैं उस हाथ को काट दूंगा।'
वरुण गांधी ने देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को भी नहीं बख्शा। उन्होंने कहा, गांधीजी कहा करते थे कि कोई इस गाल पर थप्पड़ मारे तो उसके सामने दूसरा गाल कर दो ताकि वह इस गाल पर भी थप्पड़ मार सके। यह क्या है! अगर आपको कोई (मुसलमान) एक थप्पड़ मारे तो आप उसका हाथ काट डालिए कि आगे से वह आपको थप्पड़ नहीं मार सके।  

वरुण ने अपने विरोधियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा,
'हमारे पास जो उम्मीदवारों की जो लिस्ट है, उस पर सभी दलों के प्रत्याशियों के फोटो लगे हैं। समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार की तस्वीर देखकर मेरी मौसी की बेटी ने कहा कि भैया मुझे नहीं पता था कि आपके खिलाफ ओसाम बिन लादेन चुनाव लड़ रहा है।'
मैं यहाँ पर बताता चलूँ कि सपा से रियाज़ अहमद चुनाव लड़ रहें हैं| इस वरुण ने कहा,  

'भले ही अमेरिका ओसामा को नहीं खोज पाया, पर मैं इस ओसामा को मजा चखा कर छोड़ूंगा।'  

वरुण का यहाँ तक कहना है कि रात में अगर वह किसी मुसलमान की शक्ल देख लें तो बेहोश हो जायेंगे | बड़े ही डरावने लगते हैं ये मुसलमान |  

बीजेपी एमपी मेनका गांधी के बेटे वरुण के यह बयान बीजेपी को भी रास नहीं आए। बीजेपी नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने इस बहाने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वरुण के भाषण में उनके परिवार का कांग्रेसी अतीत झलकता है। इसमें बीजेपी की परंपरा नहीं दिखती। इससे पहले, सोनिया ने कहा था कि वरुण ऐसी पार्टी से जुडे़ हैं, जिसकी विचारधारा और संस्कृति अल्पसंख्यक विरोधी है।  

मैं आपको फिर बताता चलूँ कि वरुण ने हाल ही में अपने संसदीय क्षेत्र पीलीभीत में एक रैली में कहा था, 'यह हाथ नहीं है। यह कमल है। यह मुसलमान का सर काट देगा, जय श्रीराम।' एक अन्य सभा में उन्होंने कहा, 'अगर कोई हिंदुओं की तरफ उंगली उठाएगा या समझेगा कि हिंदू कमजोर हैं और उनका कोई नेता नहीं हैं, अगर कोई सोचता है कि ये नेता वोटों के लिए हमारे जूते चाटेंगे तो मैं गीता की कसम खाकर कहता हूं कि मैं उस हाथ को काट डालूंगा।'

अब आप ही बताईये कि क्या ऐसा होगा हमारा युवा भारत और क्या ऐसे होंगे हमारे भारत के युवा नेता??????

स्रोत: नवभारत टाईम्स

Saturday, March 14, 2009

कहीं आदमी पागल तो नहीं......!!

लड़का होता तो लड्डू बनवाते....लड़का होता रसगुल्ले खिलाते......... इस बात को इतनी जगह...इतनी तरह से पढ़ चूका कि देखते ही छटपटाहट होती है....मेरी भी दो लडकियां हैं...और क्या मजाल कि मैं उनकी बाबत लड़कों से ज़रा सा भी कमतर सोचूं....लोग ये क्यूँ नहीं समझ पाते....कि उनकी बीवी...उनकी बहन....उनकी चाची...नानी...दादी....ताई.....मामी...और यहाँ तक कि जिन-जिन भी लड़कियों या स्त्रियों को वे प्रशंसा की दृष्टि से देखते हैं...वो सारी की सारी लड़किया ही होती हैं....लोगों की बुद्धि में कम से कम इतना भर भी आ जाए कि आदमी के तमाम रिश्ते-नाते और उनके प्यार का तमाम भरा-पूरा संसार सिर्फ-व्-सिर्फ लड़कियों की बुनियाद पर है....पुरुष की सबसे बड़ी जरुरत ही स्त्री है....सिर्फ इस करके उसने वेश्या नाम की स्त्री का ईजाद करवा डाला......कम-से-कम इस अनिवार्य स्थिति को देखते हुए भी वो एक सांसां के तौर पर औरत को उसका वाजिब सम्मान दे सकता है...बाकी शारीरिक ताकत या शरीर की बनावट के आधार पर खुद को श्रेष्ट साबित करना इक झूठे दंभ के सिवा कुछ भी नहीं....!!
अगर विपरीत दो चीज़ों का अद्भुत मेल यदि ब्रहमांड में कोई है तो वह स्त्री और पुरुष का मेल ही है.....और यह स्त्री-पुरुष सिर्फ आदमी के सन्दर्भ में ही नहीं अपितु संसार के सभी प्राणियों के सन्दर्भ में भी अनिवार्यरूपेण लागू होता है....और यह बात आदमी के सन्दर्भ में अपने पूरे चरमोत्कर्ष पर हैं....और बेहयाई तो ये है कि आदमी अपने दुर्गुणों या गैर-वाजिब परम्पराओं और रूदीवादिताओं के कारण उत्पन्न समस्याओं का वाजिब कारण खोजने की बजाय आलतू-फालतू कारण ढूँढ लिए हैं....और अगर आप गलत रोग ढूँढोगे तो ईलाज भी गलत ही चलाओगे.....!!और यही धरती पर हो रहा है....!!
अगर सच में पुरुष नाम का का यह जीव स्त्री के बगैर जी भी सकता है...तो बेशक संन्यास लेकर किसी भी खोह या कन्दरा में जा छिपा रह सकता है.....मगर " साला "यह जीव बिलकुल ही अजीब जीव है....एक तरफ तो स्त्री को सदा " नरक का द्वार "बताता है ....और दूसरी तरफ ये चौबीसों घंटे ये जीव उसी द्वार में घुसने को व्याकुल भी रहता है...ये बड़ी भयानक बात इस पुण्यभूमि "भारत"में सदियों से बिला वजह चली आ रही है...और बड़े-बड़े " पुण्यग्रंथों "में लिखा हुआ होने के कारण कोई इसका साफ़-साफ़ विरोध भी नहीं करता....ये बात बड़े ही पाखंडपूर्ण ढंग से दिलचस्प है कि चौबीसों घंटे आप जिसकी बुद्धि को घुटनों में हुआ बताते हो......उन्हीं घुटनों के भीतर अपना सिर भी दिए रहते हो..... !!
मैं व्यक्तिगत रूप से इस पाखंडपूर्ण स्थिति से बेहद खफा और जला-जला....तपा-तपा रहता हूँ....मगर किसी को कुछ भी समझाने में असमर्थ....और तब ही ऐसा लगता है....कि मनुष्य नाम का यह जीव कहीं पागल ही तो नहीं....शायद अपने इसी पगलापंती की वजह से ये स्वर्ग से निकाल बाहर कर...इस धरती रुपी नरक में भटकने के लिए छोड़ दिया गया हो.....!!या फिर अपनी पगलापंती की वजह से ही इसने धरती को नरक बना दिया हो....जो भी हो....मगर कम-से-कम स्त्री के मामले में पुरुष नाम के जीव की सोच हमेशा से शायद नाजायज ही रही है....और ये नाजायज कर्म शायद उसने अपनी शारीरिक ताकत के बूते ही तो किया होगा.....!!
मगर अगर यह जीव सच में अपने भीतर बुद्धि के होने को स्वीकार करता है....तो उसे स्त्री को अपनी अनिवार्यरूह की तरह ही स्वीकार करना होगा....स्त्री आदमी की तीसरी आँख है....इसके बगैर वह दुनिया के सच शुद्दतम रूप में नहीं समझ सकता....." मंडन मिश्र " की तरह....!!और यह अनिवार्य सच या तथ्य (जो कहिये) वो जितनी जल्दी समझ जाए...यही उसके लिए हितकर होगा....क्योंकि इसीसे उसका जीवन स्वर्ग तुल्य बनने की संभावना है.....इसीसे अर्धनारीश्वर रूप क सार्थक होने की संभावना है.....इसी से धरती पर प्रेम क पुष्प खिलने की संभावना है....इसीसे आदमी खुद को बतला सकता है कि हाँ सच वही सच्चा आदमी है....एक स्त्री क संग इक समूचा आदमी......!!!!!

सूअर सबसे निर्लज्ज और बेशर्म जानवर है!



"इस धरती पर सूअर सबसे निर्लज्ज और बेशर्म जानवर है| केवल यही एक ऐसा जानवर है जो अपने साथियों को बुलाता है कि वे आयें और उसकी मादा के साथ यौन इच्छा को पूरी करें| अमेरिका में प्रायः लोग सूअर का माँस खाते है परिणामस्वरुप ऐसा कई बार होता है कि ये लोग डांस पार्टी के बाद आपस में अपनी बीवियों की अदला बदली करते हैं अर्थात एक व्यक्ति दुसरे व्यक्ति से कहता है कि मेरी पत्नी के साथ तुम रात गुज़ारो और मैं तुम्हारी पत्नी के साथ रात गुज़ारुन्गा (फिर वे व्यावहारिक रूप से ऐसा करते है)| अगर आप सूअर का माँस खायेंगे तो सूअर की सी आदतें आपके अन्दर पैदा होंगी | हम भारतवासी अमेरिकियों को बहुत विकसित और साफ़ सुथरा समझते हैं | वे जो कुछ करते हैं हम भारतवासी भी उसे कुछ वर्षों बाद करने लगते हैं| Island पत्रिका में प्रकाशित लेख के अनुसार पत्नियों की अदला बदली की यह प्रथा मुंबई में उच्च और सामान्य वर्ग के लोगों में आम हो चुकी है|"


सलीम खान
स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़ 
लखनऊ व पीलीभीत, उत्तर प्रदेश

Tuesday, March 10, 2009

मैं तो यहाँ हूँ .....तुम कहाँ हो....!!


इक दर्द है दिल में किससे कहूँ.....
कब लक यूँ ही मैं मरता रहूँ !!
सोच रहा हूँ कि अब मैं क्या करूँ
कुछ सोचता हुआ बस बैठा रहूँ !!
कुछ बातें हैं जो चुभती रहती हैं
रंगों के इस मौसम में क्या कहूँ !!
हवा में इक खामोशी-सी कैसी है
इस शोर में मैं किसे क्या कहूँ !!
मुझसे लिपटी हुई है सारी खुदाई
तू चाहे "गाफिल" तो कुछ कहूँ !!
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दूंढ़ रहा हूँ अपनी राधा,कहाँ हैं तू...
मुझको बुला ले ना वहाँ,जहाँ है तू !!
मैं किसकी तन्हाई में पागल हुआ हूँ
देखता हूँ जिधर भी मैं,वहाँ है तू !!
हाय रब्बा मुझको तू नज़र ना आए
जर्रे-जर्रे में तो है,पर कहाँ है तू !!
मैं जिसकी धून में खोया रहता हूँ
मुझमें गोया तू ही है,निहां है तू !!
"गाफिल"काहे गुमसुम-सा रहता है
मैं तुझमें ही हूँ,मुझमें ही छुपा है तू !!

Thursday, March 5, 2009

''हिन्दुस्तान का दर्द'' की नयी पहल-बहस शुरू

हिन्दुस्तान का दर्द द्वारा आयोजित बहस मे भाग लीजियेआपके जेहन मे सवाल तो बहुत है पर कोई सुनने वाला नहीं,आपके पास आतंकवाद को कुचलने की तरकीब तो बहुत है पर कोई समझने वाला नहीं !या फिर इन मुद्दों के बारे मे अपनी राय रखने चाहते है,तो दिल मे दबे शब्दों को होठों तक लाइए यह मंच आपका है,हम आपके साथ है ''मुंबई पर हमला और अब पकिस्तान की सरजमीं पर श्रीलंका टीम पर आतंकी हमला,क्या इस तरह के हमलों का कोई हल है ? यदि हां तो आखिर क्या है वे कदम जिससे आतंकवाद को कुचला जा सकता है ? क्या पाक अपने बलबूते पर आतंकवाद का सफाया कर सकता है ?यदि नहीं तो दुनिया को क्या कदम उठाने चाहिए आतंकवाद और उसके पोषक पकिस्तान के खिलाफ ?''ये वे सवाल है जो हर जेहन मे गूँज रहे है अगर आप की कलम मे है वो धार जो लिख सके इन सवालों पर एक गहरी और सार्थक राय तो आज ही हमें लिख भेजिए अपनी राय,अपनी एक फोटो और अपने मोबाइल नंबर के साथ !अपनी राय हमें मेल करें-mr.sanjaysagar@gmail.com पर या फ़ोन करें-9907048438
अधिक जानकारी के लिए देखें
www.yaadonkaaaina.blogspot.com

Wednesday, March 4, 2009

ब्लॉग ने संजय सेन सागर की जान ली

आज ऑनलाइन आया तो देखा ''हिन्दुस्तान का दर्द''पर एक पोस्ट पडी हुई है जिसे संजय सेन सागर जी ने लिखा है यह मेरे लिए आश्चर्य की बात थी अब आप कहेंगे की यह महाशय तो हर रोज कई पोस्ट डालते है लेकिन बात यह है की संजय सेन सागर बी.कॉम.सेकंड इयर के स्टुडेंट है और कल से उनकी परीक्षा प्रारंभ हो रही है तो मुझे उनसे यह आशा तो बिलकुल भी नहीं थी लेकिन उन्होंने यह कर दिखाया,ब्लॉग्गिंग के प्रति इतना लगाब देखकर ख़ुशी हुई लेकिन परीक्षा के प्रति इतनी लापरवाही देखकर दुःख हुआ !समझ नहीं आ रहा है की इस ब्लोगेरिया का कोई हल है भी की नहीं,मुझे निश्चित तौर पर इनकी परीक्षा की चिंता है क्योंकि संजय सेन मेरे अच्छे मित्र है !अब इनकी परीक्षा के नतीजे का तो नहीं पता जो होगा सो देखा जायेगा,लेकिन अभी तो यह ही कहा जा सकता है की यह मासूम ब्लोगेरिया से पीड़ित हो चुका है और इसे दवा की नहीं दुआ की जरुरत है आप लोग संजय सेन सागर जी के लिए दुआ कीजिये क्योंकि यदि यह फ़ैल हुए तो मेरी भी सहमत आ जायेगी!

Sunday, March 1, 2009

हिंदी टीवी चैनलों का झूठ !

सख्त अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि भारत के टी वी चैनल (एनडीटीवी इंडिया को छोड़ कर), समाचार के नाम पर झूठ परोसने में सारी सीमाएं लांघते जा रहे हैं। ख़ास कर हिंदी टी वी चैनल। मुंबई की बारिश की ख़बरें सनसनीखेज़ बनाने के चक्कर में इन हिंदी चैनलों ने झूठी खबरों और तस्वीरों के जरिये मुंबई और बाक़ी जगहों में घबराहट फैला दी है। कुछ उदाहरण इन झूटी ख़बरों और तस्वीरों के- !1. मंगलवार की शाम “सहारा समय” ने मुंबई के उपनगर गोरेगांव की ख़बर दी और कहा कि वहां सड़कों पर 2-3 फुट पानी भर गया था। इस खबर के साथ तस्वीर दिखायी जा रही थी वहां से क़रीब 30 किलोमीटर दूर के इलाके, मरीन ड्राइव के समुद्री किनारे की जहां समंदर की ऊंची लहरें सड़क पर बौछार के रूप में गिर रही थीं।
2. “टाइम्स नाउ” ने भी उसी दिन दोपहर में मुंबई के लोअर परेल इलाके की सड़कों के वीडियो दिखाये। उस इलाके में पानी भरा हुआ था और वहां चल रहे ऑटोरिक्शा क़रीब आधा फुट पानी में डूबे हुए थे। मुंबई से परिचित कोई भी व्यक्ति जानता है कि लोअर परेल में ऑटोरिक्शा नहीं चलते, सिर्फ़ टैक्सियां चलती हैं। ऑटोरिक्शा सिर्फ़ उपनगरों में चलते और लोअर परेल उपनगर में नहीं शहर में आता है। जाहिर है कि वह वीडियो लोअर परेल का नहीं बल्कि किसी उपनगर का था। !3. “आज तक” में सोमवार की रात 8.30 बजे खबर दिखाई जा रही थी कि मुंबई में बारिश लगातार जारी है। साथ में जो वीडियो दिखाया जा रहा था उसमें दिन का उजाला दोपहर की तरह फैला हुआ था। !
सिर्फ़ और सिर्फ़ एनडीटीवी इंडिया ने दिखाया कि किस तरह बारिश और पानी के जमाव के बावजूद मुंबईवासी काम पर जा रहे थे, बच्चे स्कूल जा रहे थे, लोग एक-दूसरे की मदद कर रहे थे। यानी कि मुंबई चल रही थी और हर साल की तरह बारिश की तकलीफ और आनंद- दोनों के साथ जी रहे थे।!
मुंबई में हर साल बारिश में ऎसा होता ही है कि पानी के जमाव के कारण आम ज़िंदगी अस्त-व्यस्त हो जाये। लेकिन मुंबई वाले इससे डर कर घर पर नहीं बैठ जाते। हर कोई कोशिश करता है कि वह अपने कार्यस्थल तक पहुंच जाये, भले देर से पहुंचे। बच्चे स्कूल जाते ही हैं, लोग समंदर किनारे घूमने जाते ही हैं। !
लेकिन अफसोस, हमारे हिंदी टीवी चैनलों का यकीन करें तो मुंबई में जल-प्रलय आयी हुई है, शहर तबाही के कगार पर है और लोगों पर दिक्कतों का पहाड़ टूट पड़ा है। !
अगर यह सच है तो कैमरों के सामने लोग हाथ हिलाते हुए हंसते कैसे दिखाई दे रहे हैं? पानी भरी सड़कों पर युवक फुटबॉल खेलते क्यों दिख रहे हैं? पानी भरी सड़कों पर चप्पलें हाथ में लिये, काम पर जाती औरतें मुस्करा क्यों रही हैं? रेलवे स्टेशनों पर काम पर जाने के लिये निकले लोगों की भीड़ क्यों लगी हुई है? !
क्योंकि ये टीवी चैनल सनसनी फैलाने के चक्कर में आधा सच और कभी-कभी पूरा झूठ परोस रहे हैं!

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